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Ranjana Mathur

Abstract Action

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Ranjana Mathur

Abstract Action

सैनिक है भगवान

सैनिक है भगवान

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सैनिकों को मैं तो भगवान मानती हूँ।

इनको तो मैं देश की जान मानती हूँ।


नहीं देखते ऊंचा या नीचा

न देखें ये अमीर या गरीब

जब भी आई कोई मुसीबत 

ये वीर बांकुरे होते हैं करीब


ऐसा पुत्र माँ का अरमान मानती हूँ। 

सैनिकों को मैं तो भगवान मानती हूँ।


कहीं भूकंप से थरथराता तो 

कहीं बाढ़ में बहता यह देश

पहुंच जाते हैं पलक झपकते 

भगवन धर कर सैनिक वेश


भारतपुत्रों को सर्व महान मानती हूँ। 

सैनिकों को मैं तो भगवान मानती हूँ।


वह दिन भी कई बार है आए

अतिवृष्टि से आया जब सैलाब

जान हथेली पर लेकर जा जुटे 

प्राण आहूत कर पाया सबाब


प्रहरियों को देश की शान मानती हूँ। 

सैनिकों को मैं तो भगवान मानती हूँ।


दुर्घटना हो या बड़ी महामारी 

बालक कोई जो गिरा बोरवेल

न आलस्य न लापरवाही न देर

निकालकर लाए प्राणों पर खेल


इनको मैं देवदूत बलवान मानती हूँ। 

सैनिकों को मैं तो भगवान मानती हूँ।

रात-रात बर्फीली ज़मीन पर


आँखों-आँखों में समय बिताते 

केवल इसीलिए कि हों हमारी 

मीठी चैन से भरी स्वप्निल रातें


वो हमें देते सुख का दान मानती हूँ। 

सैनिकों को मैं तो भगवान मानती हूँ।

इनको तो मैं देश की जान मानती हूँ।


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