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Shakshi Kumari

Romance

3  

Shakshi Kumari

Romance

सावन में तेरी याद

सावन में तेरी याद

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सावन हरियाली में तेरी रूह झलकती है,

तू ख्वाब सा सांसों में आकर खुशबू बनकर बहकता है ।।  

बादल की बूंदों के संग तू मेरे तन मन को भिगोता है ,

चेहरे पर छिड़कर अपने एहसास को होश को उड़ाता है ।। 

कोयल , मोर, पपीहा देखो कैसे तुझको ही गुनगुनाते है। 

बादल भी आकाश में बैठे तेरे यादों को बरसाते है ।। 

हाथ चूड़ी, मेहँदी , कंगन तेरे बोली को गाते है ।       

आंखों के काजल को तो देखो , तेरी यादों में आंसू बहाते है ।।

सावन के बहकते फूल , कजरा बनकर मेरे बालों में लहराते है ,                           

होंठों की लाली को देखो तेरे नाम से मुस्कुराते है ।

मौसम , बरखा , बादल को तू छोड़ ,

मेरा हर श्रृंगार तेरी याद में दिल बहलाता है ।                      

सावन में तेरी याद हर पल बहुत सताती है ।।


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