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Harish Sharma

Romance

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Harish Sharma

Romance

साथ साथ

साथ साथ

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सर्दियों की ढलती ठिठुरती शाम में

धीरे कदमों से चलते हुए 


तुम्हारी हँसी गुनगुनाता हूँ 

तुम्हारे उंगलियों की सरगम अब भी


मेरे हाथ को धीरे धीरे थपथपा रही है।


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