सार्थकता सफलता की
सार्थकता सफलता की
प्रथम मनाऊँ ईश्वर अपना
सबकुछ दूँ इसके चरणों पर वार।
संबल बनकर चलूं अपनों का
इसके बिना ना कोई पार।
आत्म सशक्त कर खुद को
दिला पाऊँ कमजोरियों को हार।
हौसला बुलंद करूँ इतना
उम्मीद को भी हो जाए मुझसे प्यार।
विश्वास रख खुद पर
हार से ना मानूँ हार।
शिक्षा का शस्त्र पहनकर
मिटा दूँ भय की हाहाकार।
कोशिश करता जाऊँ परस्पर
खोल कर सकारात्मकता का द्वार।
सीख लूँ गलतियों से अपनी
बना लूँ संघर्ष को अपने गले का हार।
सत्यपरायण की राह अपनाकर
करूँ अथक परिश्रम हर बार।
समय का रखकर सदा मान
सच्चाई को दूँ पहले स्थान।
परिणाम की चिंता भुलाकर
त्याग करूँ अहंकार की भावना।
मदद करने लायक बनूँ अगर
तब सार्थक कर पाऊँ अपने संस्कार।
सिर्फ ऊँचाई पर पहुँचना नहीं है सपना
सफल कहलाऊँ जब संग हो हर अपना।
