STORYMIRROR

Prerana Pari

Tragedy Others

3  

Prerana Pari

Tragedy Others

सादगी

सादगी

1 min
217

रंगों से बड़ा लगाव था हमारा

रंग हमें बहुत पसंद थे

पर जैसे रंगों ने हमसे मुंह फेर लिया

हमें ठुकरा दिया हो


आज जिन्दगी में सफेद रंग के अलावा

कुछ नहीं बचा, जैसे वही हमारे हमसफ़र

बन गये हो


हमारी हंसी जैसे थमती ही नहीं थी, 

कभी, पर आज जैसे आंखों से आंसू

रुकते ही नहीं है


आखिर क्यों नहीं छोड़ देते हमारा साथ

जैसे  बाकीयों ने छोड़ा था, 

यह सवाल हमने अपनी सफेद और बेरंग सी

जिंदगी से पुछा था


जवाब में बस इतना मिला, " यह साथ अब

मरते दम तक नहीं छूटेगा "


पता नहीं यह कैसी रीत है समाज की, 

रंगों से भरी जिंदगी पल भर में बेरंग बन गई



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy