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Bindiyarani Thakur

Romance


4.4  

Bindiyarani Thakur

Romance


रूठना -मनाना

रूठना -मनाना

1 min 62 1 min 62

जरा जरा सी बात पर क्यों नाराज हो जाते हो

छोटी छोटी बातों को क्यों बड़ा बनाते हो?


क्या कसूर है मेरा जो इतना सताते हो

क्यों बार बार हमारा दिल ऐसे दुखाते हो

बिना गलती के ही गुनाहगार

 हमें किसलिए आप बनाते हो!


मासूम सा मन है मेरा

क्यों इसको तोड़ जाते हो 

खिलौना समझ जज्बात से 

हरबार खेल जाते हो !


इंसान हूँ मैं, मुझे भी दर्द होता है 

आपके रवैये से मेरा दिल रोता है 

ज्यादा कुछ तो मांगती नहीं हूँ मैं 

 बस जरा सा प्यार मांगती हूँ मैं !


सात फेरों के द्वारा बनी 

आपकी अर्द्धांगिनी हूँ मैं 

आपकी खुशी में खुश रहती हूँ मैं 

आप मुस्कुराएं तो हंसती हूँ मैं! 


छोटी सी तो जिंदगी है 

चलो हंसकर बिताएं 

अब छोड़िए भी ये गुस्सा 

ओ जनाब, हंस भी दो ना!  


 


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