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Dr Kaushal N Jadav

Romance

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Dr Kaushal N Jadav

Romance

रूठा हुआ दोस्त...

रूठा हुआ दोस्त...

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ए दोस्त।

क्यों रूठा है तू???

मेरी दोस्ती को आजमा के तो देख।


खफा होकर हमसे यूँ दूर न हुआ करो

ये दोस्ती बुलंद है हमारी

इसे जिंदा रखने की दुआ करो।


मेरे रूठने पर मनाने का वादा किया था तुमने

और तुम पागल ऐसे मत रूठा करो।


यूँ रूठने मनाने की तारीखें बदलती रहेंगीं ।

क्यों हर बार तुम ही रूठो ऐसी दुआ करो???


वो मजा नहीं तेरे रूठने और मेरे मनाने में

अगर दोस्ती निभाना गुनाह है तो सजा करो।


यूँ तेरे रूठने का सिलसिला चलता रहा

तो खफा हो जांएगे हम

और तुम अकेले रहने की दुआ करो।



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