युद्ध का आह्वान
युद्ध का आह्वान
रामायण का राम हूँ
मैं युद्ध का परिणाम हूँ,
रक्त से लिखा इतिहास मेरा
और विधि का विधान हूँ,
आग से लिपटी हवाओं का
एक अनकहा अंजाम हूँ,
पराक्रम का अंत नही
मैं युद्ध का आह्वान हूँ,
तूफान उठा है रणभूमि में
तलवारो का अभिमान हूँ,
भले ही कट जाए शीश मेरा
मैं खुद खुद में राम हूँ,
जोर नही है किसी और का
मैं वीरो का अभीमान हूँ
लहू बहे जो तन से मेरे
उस लहू का भूचाल हूँ
आंधी उठी जो तन में मेरे
और बोल उठेगा वज्र कह दो
अपने प्रतिद्वंद्वी से मैं
इस जंग का भूपाल हूँ।
