STORYMIRROR

V. Aaradhyaa

Classics

4  

V. Aaradhyaa

Classics

रुपहली धूप की चादर

रुपहली धूप की चादर

1 min
185

यह रुपहली धूप की चादर ओढ़कर,

इन दिनों प्रकृति खिलखिलाई है !


दूर से आती हुई सूरज़ की किरणें,

पूरे आँगन,ओसारे पर छितर आई है !


हवा में रातरानी की खुशबू घुल आई है,

अमियां की बौर भी चटककर महमहाई है!


बैशाख के महीने में यह कैसी ऋतु छाई है,

कभी लू थपेड़े तो कभी बारिश जमकर आई है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics