ऋतु परिवर्तन
ऋतु परिवर्तन
भाग्यशाली हैं हम
भारतवर्ष में जन्मे हैं
प्रकृति की गोद में
पले, खेले, बढ़े हुए हैं।
हर मौसम का आनंद उठाते
गर्मी ,सर्दी ,हँस कर सहते
बसंत ,बहार नाचते गाते
वर्षा में भी धमाल मचाते।
हर ऋतु की बात निराली
गर्मी में छाछ/आइसक्रीम भाए
सर्दी में चाय/गर्म पकवान सुहाएँ
बारिश में पकौड़े याद आए।
पतझड़ का भी अलग रंग है
सुख के बाद दुख का अनुभव है
फिर दुख के बाद सुख आता है
यही ऋतु परिवर्तन का आनंद है।
वाह! प्रभु क्या कमाल के कारीगरी दिखाई
हर मौसम में अलग खरीदारी करवाई
वेषभूषा/खानपान ऋतु अनुरूप पाई
एक से बोरियत मौसम से जान बचाई।
भाग्यशाली हम सूर्य देवता के दर्शन पाते
ऋतु परिवर्तन जीवन के रंग बढ़ाते
गर्मी की चिपचिपाहट सर्दी की रजाई पाते
वसंत बहार श्रृंगार रस पिलाते।
ऋतु परिवर्तन की छटा निराली
प्रेम प्यार छलकते हर प्याली
पूजा पाठ की भरमार है आली
माँ प्रकृति की पूजा की सजाएँ थाली।
