Chandresh Kumar Chhatlani
Tragedy
सिंकी हुई रोटियों पे
कितने ही लोग
सेंक लेते हैं रोटियां।
वो बात और है कि
उन्हें दिखाई नहीं देते
उन रोटियों में लगे
इंसानी कीडे और
इंसानी चींटियां।
वे अशुद्ध शाकाहारी
बंद कर आंखें
चबा लेते हैं सारी बोटियां।
दो छोटी कविता...
शिक्षक-प्रोफे...
जेब में
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भावशून्य
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संस्कृति
ग़ज़ल
बढ़ रहा मानव का अत्याचार दुनिया में सतत पनप रहे रोग बढ़ रहा मानव का अत्याचार दुनिया में सतत पनप रहे रोग
तब मुंह नहीं खोल पाते। बड़ी बेहयाई से खीस निपोरते। तब मुंह नहीं खोल पाते। बड़ी बेहयाई से खीस निपोरते।
वो सूरत आँखों से हटती नहीं है उसकी हर बात दिल में अखरती नहीं है। वो सूरत आँखों से हटती नहीं है उसकी हर बात दिल में अखरती नहीं है।
कितनी कोशिश करूँ मुस्कराने की छलक ही उठता है दर्द। कितनी कोशिश करूँ मुस्कराने की छलक ही उठता है दर्द।
स्त्री प्राकृतिक है प्रकृति स्त्रैण है। स्त्री प्राकृतिक है प्रकृति स्त्रैण है।
मैं उनके लिए रो रहा हूं जो मेरे रिश्तेदार नहीं हैं, मैं उनके लिए रो रहा हूं जो मेरे रिश्तेदार नहीं हैं,
लौटा खुशी खुशी अपने घर तो देखा अंधेरों की कमी न थी. लौटा खुशी खुशी अपने घर तो देखा अंधेरों की कमी न थी.
काश वो वक्त फिर से आए हँसते खेलते घर को बनाए काश वो वक्त फिर से आए हँसते खेलते घर को बनाए
मेरे चेहरे पर जो भी उदासी की लकीरें देखते हो। मेरे चेहरे पर जो भी उदासी की लकीरें देखते हो।
किसान दबा कुचला समाज समय का अभिशाप।। किसान दबा कुचला समाज समय का अभिशाप।।
अब तो लफ्ज़ भी मेरे खामोश ही रहा करते हैं अब तो लफ्ज़ भी मेरे खामोश ही रहा करते हैं
क्या उसमें आपके परिवार का तो कोई कभी तो था नहीं। क्या उसमें आपके परिवार का तो कोई कभी तो था नहीं।
सिर्फ झुनझुना बजाते ही रह जायेंगे, कोई न होगा पास अकेले रह जायेंगे। सिर्फ झुनझुना बजाते ही रह जायेंगे, कोई न होगा पास अकेले रह जायेंगे।
बन भी जाएं बंधन कोई यहां, बेशक मिलेगा तिरस्कार। बन भी जाएं बंधन कोई यहां, बेशक मिलेगा तिरस्कार।
जिस पे मुसाफ़िर थक हार के लौट सकता है जिस पे मुसाफ़िर थक हार के लौट सकता है
मेरी प्यारी मां, हो तुम कहां, मुझे छोड़ यहां। मेरी प्यारी मां, हो तुम कहां, मुझे छोड़ यहां।
काया पर इतना जुल्म मत करो मत भूलो काया नहीं तो छाया नहीं. काया पर इतना जुल्म मत करो मत भूलो काया नहीं तो छाया नहीं.
तराशा था प्यार को प्यार से मगर प्यार से वो प्यार मिला कहाँ।। तराशा था प्यार को प्यार से मगर प्यार से वो प्यार मिला कहाँ।।
बोझ से दुहरा हुआ, बदन लड़खड़ा कर गिर पड़ा। बोझ से दुहरा हुआ, बदन लड़खड़ा कर गिर पड़ा।
प्यार की महफ़िल सजाऊँगा "मुरली", तेरी इबादत करुंगा मैं। प्यार की महफ़िल सजाऊँगा "मुरली", तेरी इबादत करुंगा मैं।