"रंक को वो नवाब बना सकता है।
"रंक को वो नवाब बना सकता है।
हरेक के कर्मों का हिसाब वो रखता है,
समय आने पर जूठो को वो बेनकाब कर सकता है।
क्यूँ परेशान है बंदा अंधियारे से ?
अंधियारे को आफताब वो कर सकता है।
पल पल की सबकी खबर वो रखता है,
वो चाहे तो निष्फल को भी कामियाब कर सकता है।
क्यूँ गभरा रहा है मुश्किलों और तकलीफों से ?
वो चाहे तो रंक को भी पल में नवाब कर सकता है !
ना गभरा तू दुख और पीड़ा के अंधियारे से,
वो चाहे तो अमावस्या को भी महताब कर सकता है।
