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Kavita Sharrma

Drama

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Kavita Sharrma

Drama

रंगों की दुनिया

रंगों की दुनिया

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रंगों से जीवन को भर लो

रिश्तों में प्यार को घोलो


मीठी बोली की पिचकारी

सब मना लो होली शुभकारी


जीवन कितना छोटा सा है

किसने देखा कल यहाँ है


गर रूठा है कोई जो अपना 

समय रहते ही उसे मना लो 


अहं की होलिका जलाकर

इक कदम जरा स्नेह का बढा लो


हौले से मन को holy करके 

चलो मनाएं होली जी भरके।


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