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Dr.Deepak Shrivastava

Abstract

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Dr.Deepak Shrivastava

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रंगमंच

रंगमंच

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हर आदमी एक

कलाकार है

जिंदगी के रंगमंच पर

करता कलाकारी

जैसा जितना

उसका हिस्सा है

सभी एक कहानी

का हिस्सा हैं

किसी का छोटा

किसी का बड़ा

हिस्सा है

पर्दा उठते ही

कलाकार अपना

अपना हिस्सा करते है

डायलॉग बोलते हैं

चले जाते है

उसी तरह

इस जमीं के

जिंदगी के रंगमंच

पर हर व्यक्ति

अपनी कलाकारी

करता हैं डायलाग

बोलता हैं ओर

विदा हो जाता है

जो जितना

अच्छे से अपना

रोल प्ले करता हैं

उसको उतनी

ही तालियाँ

मिलती है

यही इस जिंदगी

के रंगमंच का

फलसफा हैं

जिसे हर एक

को निभाना हैं

निभाकर चले जाना हैं।


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