STORYMIRROR

Sanjay kumar Yadav

Abstract

4  

Sanjay kumar Yadav

Abstract

आ जाया करो

आ जाया करो

1 min
388

आते हो सपने मे मेरे तुम

कभी हक़ीक़त मे भी आ जाया करो 

हर रोज मुस्कुरा कर तुम ऐसे ना जाया करो..


तुमसे ही दिन ढलता हैं मेरा यें शाम तुम्हीं से होता हैं

चुपके से रात की चांदनी मे तुम ऐसे ना खो जाया करो..


तेरे आने की आहट से यें दिल मेरा मचल सा जाता हैं

ऐसे देखकर मुझे तुम दिल की धड़कन ना बढ़ाया करो....


आते हो सपने मे मेरे तुम

कभी हक़ीक़त मे भी आ जाया करो..


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract