रंग
रंग
रंग भरने आयें हैं मकान में आपके
कुछ रोज़ अब यहीं रहेंगे
समझेंगे ख़ाली दीवारों के मतलब
उतारेंगे खिड़कियों से पर्दों का बोझ
बेरंग दरवाज़ों को खोल कर देखेंगे
दिखाएँगे कितनी रौशनी है बाहर
रौशनी की हर लकीर में रंग गिनवाएँगे
दरवाज़े खोल कर रखेंगे दिन भर
फूल पत्तियों के साथ मिट्टी को अंदर बुलाएँगे
जब जीने की आदत पड़ जाएगी तुमको
तब निकालेंगे खीसे से अपने रंग
फिर खुद चुनना तुम दीवार हर रंग के लिए
चौगाठो में अलग रंग भरेंगे
खिड़कियों के शीशों में अलग भरेंगे
हरा केसरी लाल सब रंग भरेंगे
फिर पर्दों की भी ज़रूरत नहीं रहेगी
अंदर आती हर किरण का रंग अलग दिखेगा
तुम पाओगे हर रंग में एक सी गरमाहट है।
