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मोहित शर्मा ज़हन

Tragedy

3  

मोहित शर्मा ज़हन

Tragedy

रंग का मोल

रंग का मोल

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सपने दिखा कर सपनों का क़त्ल कर दिया,

दुनिया का वास्ता देकर दुनिया ने ठग लिया!

फिर किसी महफ़िल के शौक गिना दो,

रंग का मोल लगा लो,

उजली चमड़ी की बोली लगा दो,

फिर कुतर-कुतर खाल के टुकड़े खा लो,

बचे-खुचे शरीर पर हँसकर एक और गुड़िया का ज़मीर डिगा दो!


तेरा भी कहाँ पाला पड़ गया?

या तो इनमे शामिल हो जाना,

या फिर कोई सही मुहूर्त देखकर आना...

ये लोग लाश की अंगीठी पर रोटी सेंकते हैं.... 

और रूह की जगह रंग देखते हैं।



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