बहरी दुनिया
बहरी दुनिया
1 min
223
शायद मेरी आह तुझे अखरने लगी
तभी अपनी रफ़्तार का बहाना बना
मुझे अनसुना कर गयी
मेरा शौक नहीं अपनी बातें मनवाना,
किन्ही और आँखों को तेरी हिकारत से
है बचाना !!
तुझ से अच्छी तो गली की पागल
भिखारन
मुझे देख कर मेरे मन का हिसाब
गढ़ लेती है
आँखों की बोली पढ़ लेती है
उम्मीदों से, लकीरों से
तड़पते पाक ज़मीरों से
इशारों से, दिल के ढोल गँवारों से
कभी तो भूलेगी अपनी और
मेरी कमियाँ,
मेरी बात सुनेगी, समझेगी
यह बहरी दुनिया!!
