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सोनी गुप्ता

Abstract

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सोनी गुप्ता

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(रंग बिरंगा जीवन मेरा)

(रंग बिरंगा जीवन मेरा)

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आज यहाँ सुखों का सवेरा, कल था जहाँ दुखों का डेरा, 

जिंदगी हर पल रंग बदलती है, जाने क्या यह कहती है, 


यहाँ हर रंगो संग जी ले अपनी जिंदगी, तू यूँ मुस्कुराकर, 

जीवन के रंग देते, रिश्तों को नई पहचान खिलखिलाकर , 


कभी पतझड़ तो कभी बसंत इस जीवन में देखे कई रंग,

माना फीके तो पड़ जाते हैं रंग पर ना होते कभी भी बेरंग, 


जीवन के रंग तो हमेशा बहुत ही खूबसूरत नजर आते हैं, 

बचपन से जवानी के सफर में कितने ही रंग बदल जाते हैं, 


हमारे जीवन के अभिन्न रंगों का संसार बड़ा ही विचित्र है ,

जो समझ गया इसे उसके लिए तो यह रंग जैसे सचित्र है, 


जीवन कि इस सुन्दर बगिया में हर रंग की लहर उभरती है, 

यहाँ तो दर्द भी है तन्हाई भी कहीं मिलन तो कहीं जुदाई है,


कहा जाता हर रंग की होती है अपनी -अपनी पहचान यहाँ, 

कहीं तो उजली धूप है और कहीं तो छाया घनघोर अंधेरा है,

इस सुख-दुख के बीच में बीत रहा रंग बिरंगा जीवन मेरा है! 


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