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Pratima Devi

Tragedy

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Pratima Devi

Tragedy

रक्त करता यही पुकार-

रक्त करता यही पुकार-

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रक्त करता अब यही पुकार।
युद्ध विवेक, विराम साकार।।


आ खोजें अविरल समाधान।
नित नमन कर, शांति प्रहार।।

 
वीर अटल सम विभूषित हों।
समर तांडव, करता आहार।।

 
विकल मनुज, सकल संहार।
अश्रुपूरित कलुषित मझधार।।

 
प्रीत रीत पावन, विश्राम हार।
अंतर तृप्त सम समृद्ध धार।।

 
उज्ज्वल मन मस्तिष्क थाम।
निर्मल सुंदर, सफ़ल आचार।।

 
युद्ध! जीवन विराम, संतप्त।
तप्त वसुंधरा अम्बर अपार।।

 
जागो! भर रंग नयन चंचल।
कोमल प्राण अचल संचार।।


By Pratima Devi
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