रक्षाबंधन
रक्षाबंधन
रक्षा-सूत्र में बंधे
हरेक भारतवासी
इस विश्व को
एक सूत्र में
एकता की माला-सा
बांधकर
इस सशक्त मानव समाज को
भातृत्व बोध से
साराबोर कर
चहुंओर शांति और सद्भाव लाने में
अपना बहुमूल्य योगदान देता है...!
ये अपनी भव्य संस्कृति एवं
चिरास्था की विसात है,
जिसकी नींव हमें
रक्षाबंधन के महापर्व पर
समर्थ रूप में
रखने का
सुअवसर मिलता है...!
रक्षाबंधन केवल
भ्रातृ-भगिनी का ही
पावन संपर्क नहीं,
हम इंसानों का
प्रकृति से, पशुधन से
एवं हरेक जीव एवं
निर्जीव वस्तु से
अपनेपन का
वो एहसास है रक्षाबंधन,
जिसे हम अपनी
धड़कनों में बसा लेते हैं...
अपनी अंतरात्मा में समा लेते हैं...!
चलिए हम अनंतकाल तक
अपनी मानवता को सशक्तिकरण दें
एवं इस विश्व को
सद्भावना का कर्मस्थल बनाएंँ...!
चलिए हम एक अनन्य भाव से
इस समाज को जोड़ने की, मानव संरचना, प्राकृतिक संसाधनों एवं पशुधन को
संरक्षित करने में अपना निस्वार्थ योगदान दें...!!!
