Sandhya Chaturvedi
Drama
रिश्ते जुड़ जाते हैं
कुछ जन्म से
और कुछ बन जाते हैं।
अनजाने में कभी
गुजर जाती है।
जिंदगी इन को
सम्भालने में,
ये ही तो
धरोहर है
जीवन की।
जिंदगी गुजर
जाती है
रिश्तों की पोटली
उठाने में।
हारेगा कोरोना
ये गलियां ,ये...
मेरी जिंदगी म...
होली आयी है
कोरोना से डरो...
आज की नारी
ब्रज की होली
सीता का वनवास
कौन करता है भ...
हम डूब रहे पर जिंदा हैं इस ठंडा पवन में जलने से। हम डूब रहे पर जिंदा हैं इस ठंडा पवन में जलने से।
तारों भरे आसमान का वो सितारा हो गया, अब रात भर यादों के साथ उसे तकते हे हम। तारों भरे आसमान का वो सितारा हो गया, अब रात भर यादों के साथ उसे तकते हे हम।
इस खुशियों भरे दिन की सभी करे प्रतिक्षा। इस खुशियों भरे दिन की सभी करे प्रतिक्षा।
सभी में झलकता है, कहीं न कहीं, कभी न कभी, अपनी माँ का अटूट-अटूट प्यार।। सभी में झलकता है, कहीं न कहीं, कभी न कभी, अपनी माँ का अटूट-अटूट प्यार।।
किया परीक्षण, दी औषधि उसी क्षण, करता रहा सेवा, किया परीक्षण, दी औषधि उसी क्षण, करता रहा सेवा,
साथ जीने और मरने की कसम भी ले रही थीं उम्र भर की? साथ जीने और मरने की कसम भी ले रही थीं उम्र भर की?
मन में पड़ी दरार, अजनबी बन रह गये हम दोनों। मन में पड़ी दरार, अजनबी बन रह गये हम दोनों।
मुझे सपनों के अपने जहां से मिलने का सुवसर मिल गया अनूठे उस एक पल- मात्र में... मुझे सपनों के अपने जहां से मिलने का सुवसर मिल गया अनूठे उस एक पल- मात्र में...
सबको मिलें ऐसे अजनबी कहता हूँ मैं भरकर उमंग। सबको मिलें ऐसे अजनबी कहता हूँ मैं भरकर उमंग।
असली राजा कलम ही होती साम्राज्य झुका सकती ये जान। असली राजा कलम ही होती साम्राज्य झुका सकती ये जान।
सुने समाज, तो एक बात कहूँ, कीजिये दिन में शादी कम लोग बुलावें प्रेम से, रोकिये पैसे क सुने समाज, तो एक बात कहूँ, कीजिये दिन में शादी कम लोग बुलावें प्रेम से, रोकि...
भूल नहीं पाते पर, उसको भुलाए जी। भूल नहीं पाते पर, उसको भुलाए जी।
न रात न दिन की परवाह थी थी तो बस तुम्हारी ही बात थी न रात न दिन की परवाह थी थी तो बस तुम्हारी ही बात थी
पवित्रता की वही छाप परम्पराओं के रूप में महोत्सव पर छपी है। पवित्रता की वही छाप परम्पराओं के रूप में महोत्सव पर छपी है।
इस आधार पर होगा एक परिवार हमारा। जो सजेगा सिर्फ प्यार और विश्वास से।। इस आधार पर होगा एक परिवार हमारा। जो सजेगा सिर्फ प्यार और विश्वास से।।
पर तुम कहीं नजर नहीं आ रही थी... चारों ओर डर और सन्नाटा था। पर तुम कहीं नजर नहीं आ रही थी... चारों ओर डर और सन्नाटा था।
हम सब इतना तो मिलकर कर ही सकते हैं...! हम सब इतना तो मिलकर कर ही सकते हैं...!
सच ज्ञात है पर जागरण का पथ अज्ञात है थोड़ी सी धूप कहीं थोड़ी सी छाँव है... सच ज्ञात है पर जागरण का पथ अज्ञात है थोड़ी सी धूप कहीं थोड़ी सी छाँव है...
के रहस्य के उजागर में लगे हुये है पर कोई सुलझा ना पाया।। के रहस्य के उजागर में लगे हुये है पर कोई सुलझा ना पाया।।
ना किताबें रही ना कहानियां। रह गई तो सिर्फ बेइमानियाँ ना किताबें रही ना कहानियां। रह गई तो सिर्फ बेइमानियाँ