रेशम से रिश्ते
रेशम से रिश्ते
रेशम की बेड़ियों में समाये दिलों के रिश्ते सभी,
सरक गए मेरी बंद मुट्ठी से सूखी रेत की तरह,
रह गया केवल शून्य,अंतस् के महा शून्य में,
उमड़ती रहीं सुन्दर यादें घने बादलों की तरह।
पथराई सी आँखों के स्वप्न बने आहें मन की,
सिमटती रहीं राहें, ढलती साँझ की धूप की तरह।
निर्विकार नेत्रों के आश्वासन हुए आँखों से ओझल,
तन-मन-हृदय काँपता रहा सिहरती दूब की तरह।
मन की नदी के कगार से ढह गए सभी रिश्ते,
रह गया अजनबीपन का रिश्ता परछाई की तरह।
