राणा अमरसिंह (Promt-22)
राणा अमरसिंह (Promt-22)
चित्र में उदय प्रताप के पौत्र अमरसिंह हैं हाथी सवार।
साथ में उनका प्रिय महावत है जो था बड़ा ही ताबेदार ।
16मार्च1559 कुल सिसोदिया ,चित्तौड़ गढ़ में जन्मे थे ।
मां का नाम अजबदे बाई व पिता का महाराणा प्रताप था।
16 वें राणा के रूप में मेवाड़ पर एक छत्र शासन किया ।
8 वर्ष की उम्र से दादा-पिता का दे साथ जीवन निसार दिया ।
महलों को त्याग,मुगल संघर्ष में अरावली में दिन गुजार दिया।
महावत के संग हाथी पर सवार चक्रवीर उपाधि प्राप्त किया।
रामप्रसाद व आलम गुमान जैसे प्रिय वीर आज्ञाकारी हाथी ।
कहां मिलेंगे बेजुबान, कदम-कदम पर साथ देने वाले साथी ।
लड़े थे 17घनघोर युद्ध उस जीवट योद्धा ने, पर हार न मानी ।
जीवन बीता जलते अंगारों पर जैसे चलें असि धार शानी ।
वीरता, बहादुरी, नेतृत्व, परोपकार, न्याय, देशप्रेम, दयालुता की।
भरी भावना कूट-कूट कर उसमें कुशल शासक सहृदयता की।
एक बार मुगल सैनिकों से कर युद्ध, घोड़े "बहादुर" पे हो सवार।
कूदे किले की बड़ी व ऊँची सलाखों, लगी कटीली दीवार ।
उनके साले अर्जुन सिंह ने कर साजिश उन्हें बंदी बनाया ।
मुगल सैनिकों से मिल धोखे से उनकी हत्या का षडयंत्र रचाया।
वीर की वीरता का सही मूल्यांकन आंक सम्मान ना दे सके।
हो सके,कर याद उनको नमन श्रद्धांजलि दे उऋण हो सकें।
उनके संघर्ष व त्याग बिना आजादी की कहानी होती अधूरी।
सक्षम प्रतिरोध गवाह, मुगलसंधि, राणा उदयपुर की मजबूरी।
1605 ईस्वी मेवाड़ी स्कूल की चावण्ड चित्रकला शैली ।
स्वर्णिमकाल था वे अमर सिंह जैसे कला परख अलबेली ।
