STORYMIRROR

Hema Nair

Abstract

3  

Hema Nair

Abstract

प्यार

प्यार

1 min
42

मैं वह हूँ जो हर माँ की आँसुओं में बहती हूँ,

मैं वह हूँ जो हर पिता की डाँट में झलाखती हूँ,


मैं वह हूँ जो हर बेटे की नादानियों में बसी हूँ

मैं वह हूँ जो हर भाई-बहन की झगड़ों में छुपी हूँ,


मैं वह हूँ जो हर प्रेमी की बाँहों में समाई हूँ।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract