प्यार के दीप
प्यार के दीप
प्यार के दीप घर-घर जलाओ कभी ।
नफरतों का अँधेरा मिटाओ कभी ।।
झूठ का थाम दामन बहुत चल लिए,
संग सच के कदम इक बढ़ाओ कभी ।
हर जगह आज रावण मिलेंगे बहुत ,
ढूँढ़ कर राम दुनिया में लाओ कभी ।
अपहरण औ'र फिरौती के इस दौर में
लाज तुम नारियों की बचाओ कभी ।
स्वर्ग से बढ़ के हो जाएगी यह धरा ,
हर बुराई का दानव जलाओ कभी ।
