STORYMIRROR

Rajkumar Jain rajan

Romance

4  

Rajkumar Jain rajan

Romance

पत्र जो लिखा

पत्र जो लिखा

1 min
325

ये तुम ही हो

जो हर पल दस्तक देते हो

मेरे दिल में

हर उस गुलाबी शाम

मैं बुनती रहती सपने 

और लिखती तुम्हें


भावपूर्ण खत

इस आशा में कि

तुम आओगे एक दिन 

फिर अचानक


मैं पिघलती रही 

हर पल

तुम्हारे प्रेम की ऊष्मा पाकर

तुम्हारा प्रेम 

निश्चल था, सात्विक था


तभी तो एक दूसरे को

खोने के बाद भी

मेरी पाकीजा रूह

आज भी प्रतीक्षारत है


दुनिया का हर बंधन

सिर्फ जिस्मों के लिए है

यूं लगता है जैसे तुम स्वयं ही

अवसर की तलाश में होते हो कि

मैं तुम्हें पुकारूँ


ये तुम ही तो हो

जो हर पल दस्तक देते हो 

मेरे दिल में


कितना सुकून देता है

तुम्हें लम्बे और भावपूर्ण

प्रेम के एहसासों भरे पत्र लिखना

जिन्हें कई -कई बार पढ़ना

फिर खुद ही रो लेना


और फिर उसके असंख्य 

छोटे -छोटे टुकड़े कर

हवा के सुपुर्द कर देना

कितना अच्छा लगता है

यह सब

कभी -कभी


सुनो, आज भी मुझमें

प्रेम का ज्वार उमड़ा

मेरे यायावर दोस्त

मैंने तुम्हें प्यार का पैगाम देने

पत्र जो लिखा, मगर भेजा नहीं !


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Romance