पतझड़ का प्यार
पतझड़ का प्यार
पतझड़ का प्यार बहुत सुंदर और सुहावना होता है।
ऐसे पता चले, पतझड़ का मौसम लुभावना होता है।
इस प्यार में बस जो होती है, तो एक दूसरे की फ़िक्र।
हर बात में और जज़्बात में, एक दूसरे का ही ज़िक्र।
जब सब ज़िम्मेदारियों से, मुक्त हो जाता है इंसान।
तो पतझड़ का प्यार, और ज़्यादा चढ़ता है परवान।
जब दोनों को नहीं हो, किसी ज़माने की परवाह।
दुनिया की बातों से, दोनों ही हो जाते है बेपरवाह।
जब रहता नहीं है वह जवानी का जोश और उमंग।
बस दोनों को सिर्फ़ चाहिए, एक दूसरे का ही संग।
घूमना फिरना मुश्किल रहे, रहता नहीं है देह में दम।
खुशी चाहे जितनी मिले इस प्यार में, लगती है कम।

