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Gautam Kothari

Inspirational

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Gautam Kothari

Inspirational

पसंदगी बड़ी चंचल!!

पसंदगी बड़ी चंचल!!

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पसंद हर चीज की जीवन में 

सभी कभी पूरी नहीं होती

क्योंकि पसंदगी बड़ी चंचल है 

जो सदा एक सी नहीं रहती


पसंदगी हर चीज़ की कहा 

सब को सदा नसीब होती है

जो भाग्य में लिखा हो वहीं 

तो मनुष्य को नसीब होता है


देखे थे बड़े सपने बाप ने 

बेटा बड़ा होकर सहारा बनेगा

क्या पता था कलयुगी माया में 

वो उलझा छोड़ के जाएगा


रखे थे मन में बड़े अरमान 

रिश्ते जो निभाये वो साथ सदा देंगे

आम से पेड़ को कहा मालूम कि 

ऋतु के संग पीहू छोड़ चल देंगे


सदा किया कुर्बत से जीवनभ र 

जिसका मैंने त्याग से बड़ा जतन

वो अपने छोड़ जायेंगे ज़ब में 

बनूँगा मुनाफ़ा न देने वाला मशीन


ख़ुद को ठगा जानकर भी 

मन बड़ा रख रिश्ता जो मैंने निभाया

उन्होंने मुझको मूर्ख समझकर 

छोड़ कर दिया है आज पराया


चंद खुशियों के लिए मैंने 

जीवन भर अथक परिश्रम है जो किया

धरे का धरा वो आज तक 

व्यग्रता भर के कूड़ा बनकर रह गया


जिंदगी में जिसको बेपनाह 

मोहब्बत करता अकेला सा रह गया

दामन खुशियों का उसका 

छलकाने में मूक सा बनकर सह गया


पसंद अपनी चलती तो में 

मौत का दामन अपनी मर्जी से पाता

पर पसंद उसकी चली  

जो जिंदा रहकर मौत का दमन रहा में पाता


पसंद उसकी, ना पसंद मेरी चलती है 

आज चलती है स्वार्थ की

रहती सदा उलझने, व्यथा भर 

गुमनामी सी जिंदगी निस्वार्थ की


पसंदगी का शब्द अब में 

बिल्कुल जीवन से भूल सा गया हूं

व्यथा, हताशा इतनी व्याप्त है कि 

में आज खुद को भूल गया हूं


जीवन के अंत पर "आर्यवर्त" की 

एक पसंदगी पार होती देखी

जीवन के अंत समय पर 

जीवन जीने की चाहत को जागती देखी



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