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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy

परवाह

परवाह

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अफसाना लिखकर थक गया हूं,

तुम घर वापस कभी आती नही,

तुम्हारे बिन मै मायूस हुआ हूं,

तुम मेरी परवाह कभी करती नही।


कहां तुम चली गई हो मेरी सनम,

मुझे तुम्हारा पता मालूम नहीं,

शहर की गलियों में तुम्हे ढूंढ रहा हूं,

चहेरा तुम्हारा मै देख पाता नहीं।


ईश्क की आग से जल रहा हूं सनम,

जख्म मिटाने तुम आती नहीं,

ज़ख्मों का दर्द बहोत सह रहा हूं,

तुम्हारी रहमियत मुझे मिलती नहीं।


ईश्क में तड़पकर मर रहा हूं सनम,

खूदा की कयामत बरसती नहीं,

अब मै कफ़न में सो गया हूं "मुरली",

तुम धूप दीप जलाने भी आती नहीं।



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