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मिली साहा

Abstract

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मिली साहा

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प्रकृति की गोद में

प्रकृति की गोद में

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प्रकृति की गोद में,

समाया हुआ है समस्त संसार,

प्रकृति भरण पोषण करती हमारा,

ईश्वर का है ये अनुपम उपहार,


मां के आंचल सी शीतलता इसमें,

है हमारे जीवन का आधार,

प्रकृति का हर रूप है सुहाना,

कभी तारों का टिमटिमाना कभी अंधकार,


कहीं कल-कल करती नदियां बहती,

कहीं सागर बताते जीवन की गहराई,

कहीं आसमां को छूते ऊंचे पर्वत,

कहीं लहराती फसलों में हरियाली छाई,


कहीं चहचहाते पक्षी कहीं रंगीले फूलों की बहार,

कितना अद्भुत अनुपम कुदरत का ये नजराना,

रंग बिरंगी प्रकृति मन को देती है सुकून,

मंद मंद बहती पवन लगे संगीत तराना,


हवा की ताल पर नृत्य करते पेड़ पौधे,

प्रकृति का सौंदर्य देख दिन हो जाए सुहाना,

प्रफुल्लित जीवन का सार छुपा इसमें,

निश्चल प्यार लुटाती प्रकृति जाने सिर्फ देना,


प्रकृति से जुड़ा हम सबका जीवन,

प्रकृति से ही धरती पर बहार है,

प्रकृति की सुरक्षा हमारा परम कर्तव्य,

प्रकृति के बिना जीवन निराधार है।


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