प्रिय सखी, तू कहाँ ?
प्रिय सखी, तू कहाँ ?
चाह न चख प्रिय मिलन की
तू सखी प्रिय कहाँ रहती ?
निकट मोहित लौटती है,
निज सदन से निकला क्यों ?
इंद्रधनुषी मेघ सा छा
डूबता मन लुब्ध मंडिन
प्यार तुझको दे दिया था
तू सखी प्रिय कहाँ रहती ?
वर मिलन की सुखद क्षण में
अधर मधुमय मदिरा पी ली
नयन दल बरसाती थी प्रेम
तू सखी प्रिय कहाँ रहती ?
शुभ्र तारक मालिका में
नील विस्त्रृत विशद नभ में
चाँदनी की स्वच्छता लख
मत्त बिसमर रहे थे हम।
आश तेरे हृदय में रख
तू सखी प्रिय कहाँ रहती ?
प्रिय सखी तू कहाँ रहती
प्रिय सखी तू है कहाँ ?

