परिवार
परिवार
परिवार बड़ा या छोटा हो।
मन खरा रहे या खोटा हो।
रिश्तों में अपनापन रखना-
खुशियों में न कोई टोटा हो।
सब में मधुरिम संबंध रहे।
एक दूसरे से आबद्ध रहे।
मन में न कोई कड़वाहट हो-
तन मन से प्रतिज्ञाबद्ध रहे।
आपस में प्रेम लगाव रहे।
जीवन में चाहे अभाव रहे।
ना लेशमात्र हो क्लेश कभी-
सर पर परिवार की छांव रहे।
घर आंगन में खुशियां चहके।
जीवन चंदन वन सा महके।
खिलती बढ़ती हो प्रेम लता-
हर रिश्ता कुन्दन सा लहके।
जहां ग़म में भी खुशहाली है।
दुःख में भी जहां दीवाली है।
निस्वार्थ भाव से हृदय भरा-
रिश्तों की यही हरियाली है।
