Dinesh Sen
Abstract
राधा जब क्रष्णा संग झूले
बीती रात कमल दल फूले
राधा रूप निरख जब
कान्हा सुध बुध भूले
ज्यों उजियारी रात
रात में मुखड़ा चमके पूरे
नयन नयन से मिले
नयन से ज्यों चित चित को छू ले
आजाद और आजादी
सर्वदा विजयी ...
आज का भारत
मां भारती
बसंती बयार
बसंत की ऋतु
वसंत का मौसम
ऋतु बसंत
बसंत ऋतु आई ह...
मौसम बसंती
दिन भर की थकन और नाकामयाबी की उदासी। दिन भर की थकन और नाकामयाबी की उदासी।
भले इन्द्रधनुष बन जाना सबके और दर्पण में देख स्वयं को मुस्कुराना जमके। भले इन्द्रधनुष बन जाना सबके और दर्पण में देख स्वयं को मुस्कुराना जमके।
रंग बरसे, मोहन मतवारा। राधा घूम-घूम कर नाचें निरखे मोहन प्यारा।। रंग बरसे, मोहन मतवारा। राधा घूम-घूम कर नाचें निरखे मोहन प्यारा।।
उम्र यूं ही गुज़र गई समझने और समझाने में। उम्र यूं ही गुज़र गई समझने और समझाने में।
बचपन में याद बा आंगना में आवत रहे गौरिया .. हम बुतरू लोगन के मन बहलावत रहे गौरिया.. बचपन में याद बा आंगना में आवत रहे गौरिया .. हम बुतरू लोगन के मन बहलावत रहे गौ...
एक बच्चा होना भी नहीं होता सरल है। एक बच्चा होना भी नहीं होता सरल है।
जहाँ कभी हरियाली थी और आज जहाँ वीराना है जहाँ कभी हरियाली थी और आज जहाँ वीराना है
कभी मंजिल के पास लाते हो, कभी राहों में छोड़ जाते हो। कभी मंजिल के पास लाते हो, कभी राहों में छोड़ जाते हो।
नमन करते हैं उनको और करते उनका गुणगान। नमन करते हैं उनको और करते उनका गुणगान।
होली का ये पावन त्यौहार, सबको मिलजुलकर साथ रहने का सबक सिखलाता है ! होली का ये पावन त्यौहार, सबको मिलजुलकर साथ रहने का सबक सिखलाता है !
कठिन बड़ी डगर, नहीं हो तुम सगर, बोल रहे हर- हर, नहीं हो तुम मगर। कठिन बड़ी डगर, नहीं हो तुम सगर, बोल रहे हर- हर, नहीं हो तुम मगर।
कान्हा मारे पिचकरिया ये सखिया बदनवा भिंजेला मोर! कान्हा मारे पिचकरिया ये सखिया बदनवा भिंजेला मोर!
वो ढूँढ़ता कुछ उदास तितलियाँ और सुनाता अपनी क़िस्सागोई ! वो ढूँढ़ता कुछ उदास तितलियाँ और सुनाता अपनी क़िस्सागोई !
कहीं आतिशबाजी होती कहीं ख़ुशियों की होली! कहीं आतिशबाजी होती कहीं ख़ुशियों की होली!
खुद ही फैसला कीजिए सही क्या है? खुद ही फैसला कीजिए सही क्या है?
इस बोल के साथ कि प्रेम में हैं मौसम आते जाते हैं। इस बोल के साथ कि प्रेम में हैं मौसम आते जाते हैं।
और ये आसमान है जो सबका है, फिर भी नहीं बँटा हुआ और ये आसमान है जो सबका है, फिर भी नहीं बँटा हुआ
होरिया में भीगे सब आज रंगीलो भयो भारत हमार। होरिया में भीगे सब आज रंगीलो भयो भारत हमार।
खुद के हृदय में पाली गई ईर्ष्या खुद का ही बुझाती है, यहां दीया खुद के हृदय में पाली गई ईर्ष्या खुद का ही बुझाती है, यहां दीया
अब बस जिस्म ख़त्म हो और रुह को चैन आए, फिर ना अधेरा-उजाला चाहे और ना दिन-रात। अब बस जिस्म ख़त्म हो और रुह को चैन आए, फिर ना अधेरा-उजाला चाहे और ना दिन-रात।