परेशान दिल
परेशान दिल
जब भी होता है परेशान दिल,
लेकर बैठ जाती हूँ काग़ज़।
खींचती हूँ आड़ी तिरछी रेखा,
फिर ढूँढती हूँ उसमे अक्स उसका।
जिसकी चाहतों ने दिल मे तूफान मचा रखा है,
सारा का सारा ही हमारा वजूद हिला रखा है।
अचानक से खोलकर वो अपने दिल के राज़,
कहते हैं चलो भाग चलो मेरे साथ।
कशमकश में है मेरा दिल बेचारा,
या कहूँ है ये मोहब्बत का मारा।

