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V. Aaradhyaa

Romance Classics Fantasy

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V. Aaradhyaa

Romance Classics Fantasy

प्रेमोपहार

प्रेमोपहार

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अपने प्रेम पर समुचित विश्वास हो,

पर ना हो किसी पर कभी अंधविश्वास !


 सौहार्द और सदभाव से पूर्ण हो व्यवहार,

समझ लो ये मानव जीवन मिला है उपहार !


इस इहलोक में कुछ भी नहीं होता निराधार,

विश्वास से समुचित मनुष्यता का हो विस्तार!


अपने माता पिता और बुजुर्गो का हो आदर;

बिसर ना जाइए कभी अपने पावन संस्कार!


सदा उनका किया करें यथासंभव सत्कार,

आदर व निस्वार्थ प्रेम ही है सबसे बड़ा उपहार !


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