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Dinesh Yadav

Classics Inspirational


4.5  

Dinesh Yadav

Classics Inspirational


प्रेम

प्रेम

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जिनके हाथ सने खूनों से

प्रेम उन्हें सिखलाना है,

केवल वाद्ययंत्रों से नहीं अब

हथियारों से भी संगीत उपजाना है,

मानव के बीच छुपे दानव को

अब इंसान बनाना है !


जो मरा नहीं था गोली से

वही आज मरा है कड़वी बोली से

आओ प्रेम का आगाज़ करें

अब नफरत की होली से


जिसे सदाचार का ज्ञान नहीं

अच्छे-बुरे की पहचान नहीं

बस चलता-फिरता ढांचा है

वास्तव में वह इंसान नहीं।


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