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Seema Pandya

Abstract

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Seema Pandya

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प्रेम की गंगा

प्रेम की गंगा

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ज़माने की सोच जैसे को तैसा,नहले पे दहेला,

जिंदगी की इस रेस मे, तू नही मैं पहला।


मै जीता तू हारा,तेरा एक तो मेरा दस;

और यूं ही जिंदगी तमाम हो जायेगी बस।


छोड़ो, मिटा दो वार पे वार का ये सिलसिला,

हार जीत का , तू तू मैं मैं का ये जलजला।


बहा दो प्रेम की गंगा,बिखेर दो प्यार का फवारा।

बना दो जीवन जन्नत सा,और बना दो मौसम प्यारा।

 



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