मानव सिंह राणा 'सुओम'
Abstract
बड़ा कमाल है
रुपया दस
खाना हो पड़ाका
बच्चो को देना हो
भिखारी भी चाहते अब
झूला झूलना बस
जाना हो शौचालय
खानी कचौड़ी
मन मन में गया है बस
रुपया दस।
शहीद
सनातन का संगम
क्यूँ जलाते ह...
इतिहास रच डाल...
हमारी दिल्ली ...
मंजिले अभी और...
किरायेदार
माँ के चरण
जौहर का दर्द
जौहर की वेदना
ऐसी अनवरत नियमबद्ध को हमने आप से ही तो है पाया हम आपके ऋणी हैँ ऐसी अनवरत नियमबद्ध को हमने आप से ही तो है पाया हम आपके ऋणी हैँ
सिर्फ ये चाह बची है कि अब कोई चाह न हो। सिर्फ ये चाह बची है कि अब कोई चाह न हो।
ये दौर तो मेरी समझ से परे है इंसानियत दिखाना ज़रा आहिस्ता आहिस्ता। ये दौर तो मेरी समझ से परे है इंसानियत दिखाना ज़रा आहिस्ता आहिस्ता।
ज़िंदगी कोई खेल नहीं, ये याद रख मत बैठ। ज़िंदगी कोई खेल नहीं, ये याद रख मत बैठ।
मैं अपनी पहचान ढूँढतें- ढूँढतें, अंत में उस अलोक को, पा जाता हूँ। मैं अपनी पहचान ढूँढतें- ढूँढतें, अंत में उस अलोक को, पा जाता हूँ।
शांति एक अवस्था है जो सिर्फ़ अपने भीतर ही मौजूद है। शांति एक अवस्था है जो सिर्फ़ अपने भीतर ही मौजूद है।
बस दुश्मन पर अड़ी है देश मेरा देश तेरा देश की माटी बड़ी है। बस दुश्मन पर अड़ी है देश मेरा देश तेरा देश की माटी बड़ी है।
मानव को सौंपा भार इसके संरक्षण की मानव को सौंपा भार इसके संरक्षण की
ऊपरवाले से कातर गुहार लगाई। अनसुना कर दिया ज़माने के बधिरों ने,सृजनहार ने भी। ऊपरवाले से कातर गुहार लगाई। अनसुना कर दिया ज़माने के बधिरों ने,सृजनहार ने भी।
हर लम्हों में जीवन भर लो जीवन को मन भर के जी लो। हर लम्हों में जीवन भर लो जीवन को मन भर के जी लो।
कितने मतलबपरस्त हो तुम भी अजय कितने मतलबपरस्त हो तुम भी अजय
सच है ये जिंदगी खेल नहीं जिसका किसी से कोई मेल नहीं। सच है ये जिंदगी खेल नहीं जिसका किसी से कोई मेल नहीं।
जहां अहसासों का बसेरा है जो घर तेरा है ! जहां अहसासों का बसेरा है जो घर तेरा है !
महसूस तो वो हमसे भी ज्यादा कर जाते हैं। लगता है कभी-कभी की परवाह नहीं करते, महसूस तो वो हमसे भी ज्यादा कर जाते हैं। लगता है कभी-कभी की परवाह नहीं करते,
कभी धूप कभी छांव लगे ये जिंदगी खेल नहीं ये जिंदगी। कभी धूप कभी छांव लगे ये जिंदगी खेल नहीं ये जिंदगी।
उम्मीद का दामन थामोगे मिलेगा जीत का उपहार। उम्मीद का दामन थामोगे मिलेगा जीत का उपहार।
पर सीखना सिखाना ये क्रम खत्म नहीं होता। पर सीखना सिखाना ये क्रम खत्म नहीं होता।
मन को पूर्ण विराम मिलेगा सदा विजयी वही कहलायेगा। मन को पूर्ण विराम मिलेगा सदा विजयी वही कहलायेगा।
जहाँ मिलता आत्मज्ञान का उजाला है। जहाँ मिलता आत्मज्ञान का उजाला है।
जियो इस तरह की तुम पर नाज करे ये जिन्दगी। जियो इस तरह की तुम पर नाज करे ये जिन्दगी।