" प्रेम का एहसास "
" प्रेम का एहसास "
छुपो तुम
लाख ही मुझसे
तुम्हें मैं ढूंढ ही लूँगा
अंधेरे में
तेरी खुसबू
उसे पहचान ही लूँगा !!
चले आओ
जो चुपके से
मुझे अनुमान लग जाए!
तुम्हारी धड़कनों के
बोल का
आभास लग जाए !!
तुम्हारे चलने की
आहट मेरे
कानों में पड़ती है !
नहीं कुछ
जानने को है
वही आवाज कहती है !!
तुम्हें देखे बिना
मुझको नहीं
कभी चैन आता है !
करूँ तो
क्या करूँ बोलो
नहीं कुछ और भाता है !!
बंधी है
डोर जीवन की
ना टूटे
सात जन्मों तक !
रहे नज़दीकियाँ
सबदिन
मिलन की रात हो जबतक !!
छुपो तुम
लाख ही मुझसे
तुम्हें मैं ढूंढ ही लूँगा
अंधेरे में
तेरी खुसबू
उसे पहचान ही लूँगा !!

