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सीमा शर्मा सृजिता

Romance Classics

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सीमा शर्मा सृजिता

Romance Classics

प्रेम ईश्वर है

प्रेम ईश्वर है

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प्रेम क्या है ? 

दिल

नहीं, टूट सकता है 

साथी 

नहीं, छूट सकता है 


धड़कन 

नहीं, रूक सकती है 

नदी 

नहीं, सूख सकती है 


सूरज 

नहीं, ढल जायेगा 

समय 

नहीं ,बदल जायेगा 


चन्दा 

नहीं, उसमें दाग है 

पानी 

नहीं, बेस्वाद है 


सागर 

नहीं, माप सकते हैं 

पर्वत 

नहीं, काट सकते हैं 


धर्म 

नहीं, बांट सकते हैं

शक्ति 

नहीं, क्षीण हो सकती है 


बुद्धि 

नहीं, संकीर्ण हो सकती है 

ईश्वर 

हां ! ईश्वर 

सुना तुमने !

प्रेम ईश्वर है।


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