प्रेम अगन
प्रेम अगन
तुम जानती हो
बारिश की बूंदों जैसा
है तेरा मेरा प्यार
मन तृप्त तार तार।
सूखी सी पतवार
वो सौंधी सी मीठी अगन
एक तड़प के बाद
चलती आलसी बयार।
कुछ शब्द होंठों पर
दिल में एक अथाह सागर
वक्त भी कितना सा है
हर खयाल आर पार।
हृदय व्यथित सा तो है
व्यथा की सीमा भी अपार
प्रेम ज्योत जब भी जले
मचे शोर शराबा हाहाकार।

