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Shubhra Varshney

Abstract

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Shubhra Varshney

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पिया मिलन की आस

पिया मिलन की आस

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करें कलरव कोयल दिन रात

नित हठ करें मेरा हृदय जलजात।


मन मनमीत के दर्शन पाए

होली पर सुंदर स्वप्न सजाए।


अविरल अलपक नयनो को आस

कबहुँ लगे पलभर कबहु जन्मों की प्यास।


चंद्र चकोर सम कुछ ना भाए

हृदय में रंग थामे पिया प्रतिबिंब समाए।


दिन दिन दर्शन को हृदय तरसे

बांध तोड़ बहे अश्रु नयन से।


पड़ी बौछार रंग प्रेम सुधा की

मनभावन छवि निखरी पिया की।


अब ना करूँ हठ ना करूँ मनुहार

पड़ बौछार हुई तृप्त हृदय की पुकार।


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