फूल की किस्मत
फूल की किस्मत
नन्ही सी कली,
एक दिन बागों में खिली।
एक तितली आई,
खिले फूलों पर मंडराई।
उसके बाद भंवरा आया,
आकर अपना गुंजार मचाया।
उड़ती उड़ती मधुमक्खी आई,
आकर अपना छत्ता लगाई।
छत्ते में शहद पिरोया,
फूलों ने अपना रस है खोया।
एक दिन एक पुजारन आई,
फूल तोड़ कर घर ले आई।
उन फूलों का माला बनाई,
मंदिर में भगवान को पहनाई।
उस फूल ने भी क्या किस्मत पाई,
जिसकी कृपा से खिली,
उसके गले में सज पाई।
