Chetan Gondaliya
Abstract
इक मुद्दत से आरज़ू थी कि
फ़ुरसत मिले तो सब से मिलें...
और फ़ुरसत मिली तो इस
शर्त पर मिली के
किसी से न मिलें।
निवृत्त सेनान...
सबसे सच्चा और...
सफर जारी है.....
सूख लगे...
फ़ुरसत
समय बहरा होता...
जरूरी था...
सीख लो..
किये होंगे...
पूछता फिरता हूँ पता खुद ही से खुद का धोबी का कुत्ता हूँ मैं घर का ना घाट का ।। पूछता फिरता हूँ पता खुद ही से खुद का धोबी का कुत्ता हूँ मैं घर का ना घाट का ...
तब तुमने मुझसे उस ख़ामोशी में भी कुछ न कुछ बुलवाया है, तब तुमने मुझसे उस ख़ामोशी में भी कुछ न कुछ बुलवाया है,
यहाँ सच के आगे झूठ की दादागिरी नहीं चलती। यहाँ सच के आगे झूठ की दादागिरी नहीं चलती।
आसमान में' मैं' खोजता खोया पिछड़ा एक अपने में झुलसते आसमान में' मैं' खोजता खोया पिछड़ा एक अपने में झुलसते
वो हमें ठीक से परख लेते तो कभी, वो हमें ठीक से परख लेते तो कभी,
स्वीकार कर रहे हैं उसी गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और अशिक्षा को स्वीकार कर रहे हैं उसी गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और अशिक्षा को
नफरत से अब नफरत न कीजिए नफरत को भी भरपूर सम्मान दीजिए। नफरत से अब नफरत न कीजिए नफरत को भी भरपूर सम्मान दीजिए।
खुद अंधेरे में रह जाता है जग को रोशन कर जाता है खुद अंधेरे में रह जाता है जग को रोशन कर जाता है
हमने खुद को ज़िंदा जलते देखा है रोशन दिन आँखों में ढलते देखा है। हमने खुद को ज़िंदा जलते देखा है रोशन दिन आँखों में ढलते देखा है।
औरों के कष्ट मिटाकर खुद कष्ट उठाए नेकी करके भी बदनामी ही पाए औरों के कष्ट मिटाकर खुद कष्ट उठाए नेकी करके भी बदनामी ही पाए
इक दूजे पे है विश्वास जिंदा है प्रेम जीवन की साँस। इक दूजे पे है विश्वास जिंदा है प्रेम जीवन की साँस।
यदि खुद को संभाल न पाए, जीवन में पीछे रह जाओगे तुम मै हूँ कौन, क्यों हूँ यहाँ कर्तव्य। यदि खुद को संभाल न पाए, जीवन में पीछे रह जाओगे तुम मै हूँ कौन, क्यों हूँ यहाँ...
चाबी खो दी है उसकी मैंने तोड़ने उसे नहीं कभी वाला हूँ मैं चाबी खो दी है उसकी मैंने तोड़ने उसे नहीं कभी वाला हूँ मैं
जिस पल तुम्हें अच्छे-बुरे का सम्यक ज्ञान प्राप्त होगा, जिस पल तुम्हें अच्छे-बुरे का सम्यक ज्ञान प्राप्त होगा,
तुम्हारे चेहरे पर गुरुर नजर आता है मुझे तो हर तरफ इश्क़ नजर आता है। तुम्हारे चेहरे पर गुरुर नजर आता है मुझे तो हर तरफ इश्क़ नजर आता है।
पुलकित पुलकित मन की आशा जहाँ न हो कहीं निराशा पुलकित पुलकित मन की आशा जहाँ न हो कहीं निराशा
'अ' अनार से शुरू कर 'ज्ञ' ज्ञानी तक पहुँचाती हूँ 'अ' अनार से शुरू कर 'ज्ञ' ज्ञानी तक पहुँचाती हूँ
हृदय की दूरियाँ बढ़ी इतनी अपने भ्राता नहीं अपने रहे, हृदय की दूरियाँ बढ़ी इतनी अपने भ्राता नहीं अपने रहे,
रोज उतारू नजर तुम्हारी , जान भी मेरी जान, तुझ पे वारी है , रोज उतारू नजर तुम्हारी , जान भी मेरी जान, तुझ पे वारी है ,
खामोशी मेरी बताती है बात मेरी जज़्बाती है। खामोशी मेरी बताती है बात मेरी जज़्बाती है।