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SUNIL JI GARG

Comedy Drama Thriller

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SUNIL JI GARG

Comedy Drama Thriller

फैंटेसी की आदत

फैंटेसी की आदत

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आसमान में उड़ें अपनी कार से

बादलों के बीच से गुजरते हुए

स्टीयरिंग हाथ में तुम्हारे हो

गुलाबी दुपट्टा जाए लहराते हुए


रास्ते में मिले कोई दोस्त भी

अपनी सवारी से ऐसे ही उड़ते हुए

कहीं हवा में मिले कोई रेस्टोरेंट

वहाँ दोनों रुकें गाड़ी वो भी उड़ते हुए


स्वादिष्ट खाना हो मेज पे सजा

खाएं उसको जी भर मजे लेते हुए

फिर से गाड़ी में वापिस आ जाएं

सेल्फियां रुक रुक के खींचते हुए


अभी सबको लगेगा ये सपना

कोई आवाज देगा नींद जाएगी टूट

पर मैं ऐसा दिन में भी सोचता हूं

फैंटेसी की आदत नहीं रही छूट।


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