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मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

Action

4  

मुकेश कुमार ऋषि वर्मा

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पहाड़

पहाड़

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पहाड़--------हरे -भरे पेड़, हरी- हरी नरम घास, 

नाचते मोर-चहकती चिड़ियां, फूलों पर मंडराते भंवरे, 

हवा में इठलाती तितलियां

पहाड़ों को सुंदर/बहुत सुंदर बनाती हैं। 


परंतु पहाड़ अपने सीने में असीम दर्द छिपाए हुए हैं 

पहाड़ हमें दिखते-हंसते- मुस्करातेदूर से...

हमने पहाड़ को बहुत दर्द दिया है विकास के नाम पर ! 


हमने अपने स्वार्थ के लिए कमजोर कर दिया पहाड़ को

वे टूट रहे हैं, तिल-तिल मर रहे हैं 

अपने आंसू नहीं दिखा सकते किसी को

पहाड़ है न इसलिए...


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