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Krishna Sinha

Abstract

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Krishna Sinha

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पदचाप

पदचाप

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सुनी पदचाप..

प्रिय सखी आज...

मधुर आगाज़...

झंकृत साज़...

उमंगें अकुलाई...

बसंत ऋतू आयी...


नव पल्लव शोभित

प्रसून सुगन्धित

यौवन विकसित

मन वीणा तरंगीत

उमंगे अकुलाई...

बसंत ऋतू आयी...


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