पापा
पापा
जैसे बिना काँक्रीट के छठ
के बिना घर-घर नही होता
वेसे ही बिना पिता नाम के छठ
के बिना लाइफ़-लाइफ़ नही होता।
माँ तो हमें पैरो से चलना सिखाती है
लेकिन पिता तो हमें पैरो पे खड़ा होना सिखाते है।
मेने देखा है पापा के आँखों में
जज़्बा अपने बचो को खुद से भी क़ाबिल बनाने का
जज़्बा अपने बचो को खुद से जड़ा कम्फ़र्ट देने का।
मेने देखा है पापा को सूरज की
तरहा तपते हुए अपने परिवार के लिए
और चाँद की तरहा अंधेरे में भी
रोशनी अपने परिवार पे बिखेरते हुए।
ममी में ने दिया है जन्म
पापा ने दी हुई है साँसें
चमके हम जो दुनिया में है वो इरादा पापा के।
ईश्वर हो या वाहेगुरु नूर सबका है आपमें
स्वर्ग की जनत हो या स्वर्ग लोग सब अपमें दिखता है।
पापा परिवार के वो ढाल है
जो लड़ते हर मुसीबत से है
जो हाथ ना हो आपका माथे पे
तो बिके हम इस जग में है।
याद है मुझे आपके वो सैक्रिफ़ायस
मन बिना भी हमारी माँगे पूरी करना
खुद होके भी बीमार
टेस्टिंग और इलाज हमारी करना।
देखा है मेने पापा को खुद पुराने कपड़े पहनते हुए
और दिवाली आने पे
परिवार के तन नए कपड़ों से धक्ते हुए।
गुस आपका सुनता हूँ में हर बार
क्यूकी उसमय है आपके प्यार की बोछार
मज़ा आता है मुझे जब करते हैं
आप अपने स्नेह की बोछार।
याद है पापा मुझको आपका स्कूल में लेने आना
याद है डैडी मुझको आपका हॉस्टल में मिलने आना।
लाख बार माँ उठती है सभा
पर में तस से मस भी ना होता हूँ
जो आवाज़ आपकी आती है “अरे उठ जा रे”
मी झट से अपनी आँखे खोल लेता हूँ।
मोत आइ थी मुझको
मेरे सामने आप खड़े थे
मेरे रब से भी आप लड़के
मुझे वापस आप ले आए थे।
अगर जो आप ना होते पापा
तो उँगली पकड़ कोन चलता मुझको
ज़िन्दगी ने जब जब ठोकर है मारी
तो हाथ पकड़ कोन सम्भालता मुझको।
माना थोड़ा अकड़ूँ ही में
दिल भी आपका दुखता हूँ
लेकिन सच बोलूँ पापा
आप जो एक पल भी ना दिखो ना आज भी भोत
घबराता ही में।
जैसे बिना काँक्रीट के छठ
के बिना घर-घर नही होता
वेसे ही बिना पिता नाम के छठ
के बिना लाइफ़-लाइफ़ नही होता।
