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संदीप सिंधवाल

Abstract

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संदीप सिंधवाल

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पालने दो आरज़ू

पालने दो आरज़ू

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पलने दो आरज़ू को दिल में

ये भी एक दिन रंग लाएगा।


बड़ी अचरज सी नज़रों से 

हर वाशिंदे को दंग पाएगा।


एक बदलाव की सोच से

कायदे की तू जंग लाएगा।


दो हाथ अभी अकेले भले 

हजारों हाथ तू संग पाएगा।


छोटी चिनगारी मत बुझा

ज्वाला सी अंग अंग पाएगा।


पलने दे आरज़ू को दिल में 

ये भी एक दिन रंग लाएगा।।


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